Thursday, 12 August 2010

धर्म अधर्म , अधर्म धर्म सा...
धर्म वीर है , वीर अधर्म का...
निस्तेज हो चला है तेज सत्य का असत्य के अंधकार में ....
मर मिट रहे हैं धर्म के लिए अधर्म की एक पुकार पे ...

No comments:

Post a Comment