मोहन मोहनी का करी मोहन मोह ना जाए ....
मोहन मोहनी का करी मोहन मोह ना आए ....
ये तन, मन पर हावी है
तन से मन कंही ना जाए
निर्धन तन को धन भावी है
धन से मन कंही ना जाए
तन धन से बंधा हुआ मन;
मन बंधन खुल ना पाए
मोहन मोहनी का करी मोहन मोह ना जाए ....
मोहन मोहनी का करी मोहन मोह ना आए.....
मोह माया से भरी धरा ये
मोह बिन कोई कैसे रह पाए
ज्यों त्यागूँ मैं मोह धरा से
त्यों तुझसे ही मोह लग जाए
ऐसी उत्क्रस्ट रचना धरा है तेरी
देख जिसे निर्मोही भी सकुचाए
मोहन मोहनी का करी मोहन मोह ना जाए .....
मोहन मोहनी का करी मोहन मोह ना आए.....
रजनीश ..........
So true...
ReplyDeleteIts your Word! if it is then its very Good.
ReplyDeleteyes sir these are my words!!
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