
फूलों सी तुम नहीं तो क्या
मेरे दिल में तुमसे ही बहार है |
हिरनी सी चाल नहीं तुम्हारी तो क्या
मेरे दिल को तुम्हारा ही इंतजार है |
संगेमरमर में तराशा बदन नहीं तो क्या
मेरे दिल में एक शिल्पकार है |
हार जाऊं इस ज़माने से तो क्या
मेरे दिल को तुमसे जीत की दरकार है |
हैं फिजायें खुबसूरत तो क्या
मेरे दिल को सिर्फ तुमसे ही प्यार है |
झुकी पलकें, बंद होठों से ही कहना
मेरे दिल पर तुम्हे भी ऐतबार है |
झुकी पलकें, बंद होठों से ही कहना मेरे दिल पर तुम्हे भी ऐतबार है |
रजनीश....
wah..kya baat hai :) kiske liye likha hai?
ReplyDeleteThaanks..Its in general..kisi particular ke liye nahee hai :-)
Deleteबहुत खूब !! खास कर अंतिम दो पंक्तियाँ "झुकी पलकें, बंद होठों से ही कहना मेरे दिल पर तुम्हे भी ऐतबार है |"
ReplyDeleteउधर से क्या जवाब आया अगली कविता में बताना :)
dhanyawaad omi bhai..ab tum to samjhte hee ho ..koi ho na ho hum jaise log likh jarur dete hain ;-)
Deletenice poem, liked :-)
ReplyDeleteThanks Priyanka...
Deleteखूबसूरत !!
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